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Kabir das ki kahani osho ki jubani osho Hindi speech

11:24Hindi43 segments1,424 words, 7 min read

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TL;DR

इस वीडियो में कबीर दास की कहानी को ओशो की जुबानी सुनाया गया है, जिसमें कबीर की जीवन यात्रा और उनकी शिक्षाओं का वर्णन है।

कबीर दास की कहानीओशो की जुबानीकबीर का जीवनकबीर की शिक्षाएँकबीर की पत्नीकर्ज की समस्याकबीर का आनंदकबीर का संदेश

Chapters

  1. 0:00कबीर की कहानी की शुरुआत
    01
  2. 2:00कबीर का जीवन और संघर्ष
    02
  3. 4:00कबीर की पत्नी और कर्ज की समस्या
    03
  4. 6:00कबीर की मस्ती और आनंद
    04
  5. 8:00कबीर की शिक्षाएँ और संदेश
    05
  6. 10:00कबीर को तीर्थंकर मानना
    06

Transcript

0:00

कि कोई कबीर को तीर्थंकर नहीं रहता हालांकि कबीर में क्या कमी है इसलिए तिथंकर से है मगर कैसे कबीर को तीर्थंकर को जुला है छोड़ने अगर आपको कुछ ही नहीं पकड़ने कोई नहीं छोड़ने को कहा सुनाओ

0:16

कि रोज भूल जाते हैं कपड़ा रोज बेच लेते हैं बस किसी तरह खाना-पीना चल जाए वह भी पूरा नहीं चल पाता उसमें बड़ी झंझट आ जाती बुरी अद्भुत कहानी सत्य वेदांत like मुझे भेजिए

0:31

भेजिए आप बहुत प्यारी हो को खींचने जैसी अ है और सिर्फ कबीर जैसे आदमी की जिंदगी में हो सकती हैं कि कबीर की कीमत

0:46

कि भूख नहीं मुश्किल है एक कहानी यह है [संगीत] है कि कबीर को है तो जो भी घर में आ जाए तो हैं और सुबह से बहुत से लोग आ जाते कबीर

1:01

की मस्ती में कौन डूबना चाहे कबीर के आनंद कौन भागीदार न होना चाहिए दूर-दूर से लोग आ जाते सुबह से 536 जाता नाच होता गीत होता है

1:18

[संगीत] कि भीतर की शराब रहती है कि लोग मदमस्त होकर पीते कि भोजन का समय हो जाता तो कबीर की आदत थी वह लोगों से कहते भैया रूम में चले जाएं अरे भोजन तो

1:33

कर जाओ अब आएगा तो भोजन कर्जा कभी दोस्तों आदमी कभी 300 आदमी को भी 500 आदमी गरीब प्रवीर की हैसियत क्या है में बमुश्किल दिन भर कपड़ा भूनकर कितना बोलोगे कि उदाणी चलती जाती पत्नी परेशान बेटा

1:51

परेशान [संगीत] कि एक दिन यह हालत हो गई कि जब पत्नी बाजार गई और दुकानदार सूसन भोजन के लिए

2:05

प्रार्थना की कि घर में दो स्वाद में बैठे कि अ मेरे पति निमंत्रण दे दिया मैं पीछे के दरवाजे से बात किया ही जल्दी से कुछ चावल दोगी 2882 उस दुकान दोनों का बहुत हो गया

2:19

गया मैं पहले का कर्ज चुका यह कर्ज बढ़ता ही जा रहा है चुकेगा कैसे मेरी दुकान तुम दबा दोगे कि एक वीर का तो बजरंग चले थे [संगीत]

2:34

[संगीत] कि अ मेरा भंडा फूटता जा रहा है कि कबीर तो हर किसी को निमंत्रण दे देते हैं कबीर को पता है कि बर्बादी मेरी हो रही है है कि चुकेगा कैसे कर जितना हो गया कि आप

2:50

लोग और नहीं दे सकता पत्नी ने ना कुछ भी करो आज तो देना ही होगा इज्जत का सवाल है मैं किस मूह से जाकर को लोग बैठे कि भोजन तो कराना ही होगा कि

3:06

कि उस दुकानदार वो बहुत दिन से कबीर की पत्नी का नजर आ कि कबीर की पत्नी थी सुंदर रही हो कि कबीर जिस व्यक्ति की पत्नी को पसंद करती रही होगी तो सुंदर हो गई होगी

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